For 1 year Subscription of Pragatisheel Sahitya Monthly Magazine.

Click the button below -

New Editorials of

Ram Kumar 'Sewak'

(Chief Editor, Pragatisheel Sahitya) {Former Editor of an

international spritual

monthly magzine}

are available on :-

www.maanavta.com

 

 

 

 

 

 

Ram Kumar 'Sewak'

राम कुमार 'सेवक' हिंदी भाषा के प्रबुद्ध साहित्यकार है 1964 में मुराद नगर (उत्तर प्रदेश) में जन्मे 'सेवक' जी स्नातकोतर(MA) उपाधि प्राप्त है। मात्र 14 वर्ष की आयु में आपने पहला लेख लिखा जो की स्थानीय समाचार पत्र में छपा। साहित्य साधना की यह सहज यात्रा सत्तत रूप से जारी है।

आप मूलत: गद्या लेखक हैं लेकिन आपनी गणना सवतंत्र शैली की काव्य रचना करने वालों में भी की जाती है। आपका लेख, स्तम्भ, व्यंग्य कहानिया व् कवितायेँ अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहते हैं। आपकी कई रचनाएँ आकाशवाणी पर भी प्रसारित हो चुकी है। रेडियो मास्को व् ताशकंद अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टिट्यूट सहित अनेकों संस्थाओं द्वारा भी आपको सम्मानित व् पुरस्कृत किया जा चुका है।
'पढ़ा सुना कहा', बड़े लोग बड़ी बातें', पढो कहानी, प्रकाश पुंज, 'काव्य वीणा', सहनशीलता आदि कई पुस्तकों का आपने संपादन भी किया है। वर्ष 2000 में आपकी पुस्तक 'बूँद-बूँद सागर' प्रकाशित हुई, जिसके पांच संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। साप्ताहिक मुराद नगर टाइम्स, दैनिक मुज़फ्फरनगर बुलेटिन, वचनबद्ध (भोपाल), तंत्र इंडिया (दिल्ली), पींग (रोहतक) आदि समाचार पत्रों से जुड़ने के बाद 1986 में संत निरंकारी मासिक पत्रिका से जुड़े। अगस्त 2011 तक इस पत्रिका के हिंदी संस्करण के संपादक के रूप में सेवारत रहे। अभी आप लोकप्रिय आध्यात्मिक वेबसाईट मानवता (maanavta.com) में मुख्य संपादक (अ) हैं। आध्यात्मिक कवियों के प्रतिनिधि मंच - लोक कवी सभा में भी आप 1988 से निरंतर सक्रिय है।
आपके लेख प्राय: विचारोत्तेजक व् लीक से हटकर होते हैं। आपके व्यंग्य लेखों में प्राय: तीखापन दृष्टिगोचर होता है। आपकी रचनाएँ पाठक को सच्चाई के कठोर धरातल पर लाकर आत्मावलोकन करने पर विवश कर देती है।
'जीने की राह' व् सुखी जीवन की ओर' के बाद 'हमारे संत महापुरुष, नामक पुस्तकों की श्रृखला के दूसरे भाग में भी 'सेवक' जी ने विशव के अनेकों भागों में हुए संतों-महापुरषों के जीवन परिचय तथा शिक्षाओं को संकलित-संग्रहित करने के कार्य को आगे आगे बढाया है। प्रस्तुत पुस्तक में संत नामदेव जी, महर्षि वाल्मीकि, देवरिषि नारद, भक्त प्रह्लाद समर्थ गुरु रामदास, धन्ना भगत, ध्रुव तथा नारायण गुरु आदि बीस महापुरषों के जीवन व् शिक्षाओं को रोचक व् सारगर्भित ढंग से प्रस्तुत किया गया है।