For 1 year Subscription of Pragatisheel Sahitya Monthly Magazine.

Click the button below -

New Editorials of

Ram Kumar 'Sewak'

(Chief Editor, Pragatisheel Sahitya) {Former Editor of an

international spritual

monthly magzine}

are available on :-

www.maanavta.com

 

 

 

 

 

 

Reader's forum

 

जीने की  राह

जीने की राह -एक पाठिका की प्रतिक्रिया 
श्री राम कुमार सेवक द्वारा रचित पुस्तक - जीने की राह पढ़कर इतनी प्रसन्नता और आत्मसंतोष मिला जैसे मुझे इस पुस्तक से जीवनोपयोगी महत्वपूर्ण पथ मिल गया हो | इसमें दिए गए अनेक  प्रकार के उदाहरणों सहित महत्वपूर्ण सुझाव हमारे दैनिक जीवन में हमारे विचारों को निखार व्  ऊंचाई प्रदान करके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की प्रेरणा देते हैं| इस प्रकार सहज-सुंदर जीवन जीने का मार्ग-दर्शन प्रदान करते हैं|
आपने थोड़े से शीर्षकों द्वारा सम्पूर्ण जीवन को समेट दिया है |कोई भी पहलू ऐसा नहीं है जो आपने छुआ न हो |सामाजिक,शारीरिक ,मानसिक,पारिवारिक,राष्ट्र,समाज,विश्व के प्रति नौजवान,बच्चे व् बूढ़े आदि सभी को आपने इस पुस्तक द्वारा जागरूक किया है|सरल भाषा में सत्यनिष्ठा के साथ विचारों को समझाने का प्रयास किया गया है|
पाठकों को अपने विचारों और भावनाओं के साथ जीने की राह पुस्तक के विचारों को अपनाना और समझना चाहिए|
मुझे यह पुस्तक रोचक,सरल,संयमित तथा साथ ही उत्साही जीवन जीने में सहायक लगी|आशा करती हूँ की समस्त पाठकों को भी सम्पूर्ण लगेगी|

                                                                                       

                                                                               -ऐश्वर्या दलाल (दिल्ली)

 

जीने की राह पुस्तक लिखने  हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद|मैंने यह पुस्तक तीन बार पढ़ी/सच बात तो यह है कि  मैंने इस पुस्तक को सिर्फ पढ़ा नहीं है बल्कि जिया है|मैं अपने ज़हन में सही शब्दों को ढूंढ रहा हूँ ताकि मैं अपनी भावनाएं सही-सही बता सकूँ|आपका धन्यवाद कर सकूं| मुझे ऐसे शब्द नहीं मिल रहे हैं जो मेरी भावनाओं को सही रूप में प्रकट कर सकें |आपने इस पुस्तक में जीवन जीने की जो कला सिखाई है वो बहुत ही सराहनीय है| धन्यवाद के भाव के साथ जो सुबह की शुरुआत की है वो जीवन को सकारात्मकता से भर देती है|प्रकृति को भी आपने मानव जीवन के पास लाकर  खडा कर दिया है|स्वस्थ्य को भी आपने जीवन जीने की कला के रूप में प्रस्तुत किया है और बहुत सरल भाषा में स्वस्थ्य के नियमो को रोचक अनुभवों के साथ प्रस्तुत किया है|आपका यह कहना बिलकुल सही है कि  आदमी पैसा कमाने  के लिए अपना स्वस्थ्य खोता है ,उसे वापस पाने के लिए फिर पैसा खर्च करता है सोचने की बात यह है कि फिर कमाया क्या ? इसलिए स्वस्थ्य पर ध्यान देना ज़रूरी है|स्वस्थ्य के बाद आपने कर्म पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है|कर्म व् कर्मफल के बारे में आपने विस्तार से बताया है|साथ ही कर्म व् कर्त्तव्य का फर्क भी बताया है|ये गूढ़ भेद ऐसी सरल भाषा में प्रकट किये गए हैं कि  कम पढ़े -लिखे व्यक्ति को भी आसानी से समझ में आ जाते हैं|कर्त्तव्य में आत्मा के  मूल को जानने के लिए प्रेरित करके आपने आध्यात्मिकता व् दर्शन को भी जीवन का अनिवार्य अंग बना दिया है|विश्व के,देश के,समाज के,परिवार के प्रति जो कर्त्तव्य हैं उन्हें बहुत अच्छी तरह आपने औचित्य के साथ समझाया है|विश्व में फैली कुरीतियों  की तरफ भी आपने ध्यान आकर्षित किया है|बेटा-बेटी में फर्क न करने की तर्कपूर्ण हिदायत  के साथ भ्रूण ह्त्या के हानिकारक परिणामों के प्रति भी सचेत कर  दिया गया है|कोई पहलू छोड़ा नहीं गया है|दहेज़ की समस्या का प्रैक्टिकल समाधान भी सुझाया है|  हर आदमी आज अपने अधिकारों के लिए चेतन है लेकिन कर्तव्यों से आँखें फेरे बैठा है|आपने इस विकृति से बचाने के लिए पहले कर्तव्यों को ही सामने रखा है|  सविधान द्वारा दिए गए अधिकार व कर्तव्यो को भी पुस्तक में बहुत सरल तरीके से समझाया गया हे| इस प्रकार आपने जीवन को  बहुत सुंदर दिशा दी है|                                                                        परखने की कला व् धैर्य ये  दो अध्याय तो मानों  ऐसी छाप  छोड़ गए कि  शायद ही कभी किसी लेखक ने इनके बारे में कोई सूझ  किसी को दी हो|परख जीवन में क्यों ज़रूरी है और  परखने के लिए एक पारखी नज़र कैसे विकसित होती है ?इन सवालों के जवाब में आपने एक ऐसी साइंस प्रदान कर दी है जिससे किसी की भी जांच-परख आसान  हो गयी है|                                     सेवक जी आपकी पुस्तक केवल मात्र  किताब नहीं है बल्कि  एक ऐसी  यात्रा है जो सुबह  से  शुरू होती है व् समय बीतते- बीतते घर ;गली ;मोहल्ले से होकर बाज़ार; शहर; समाज; देश विदेश से होकर शाम को अपने ही घर में जाकर समाप्त  होती है | किताब पढ़ते  समय ऐसा  नहीं लगता की कोई  किताब पढी  जा रही है बल्कि  ऐसा लगता है जैसे हम लेखक के साथ यात्रा का आनंद ले रहे हैं |यात्रा  में कई पड़ाव  आतें हैं |और अंत में फिर मंजिल पर पहुंचते हैं| बहुत ही सुंदर कृति  आपने प्रस्तुत की है|भाव बहुत ही  सुंदर हैं| बीच-बीच में  छोटे- छोटे उदहारण व् कहानिया ,जिनके द्वारा  भी बहुत सुंदर प्रेरणा दी गयी है| विभिन्न काव्यांश और श्लोक भी प्रयोग किये गए हैं| यकीन  मानिए यह  पुस्तक एक जीवंत यात्रा है|इस यात्रा के अगले भाग की अभी से लालसा पैदा हो गयी है|आप इसी प्रकार प्रेरक साहित्य की रचना करते रहे ,यही शुभकामना है|                                                                                                                                                                                               

                                                                                  लेख राज (अधिवक्ता)                  

मनाली, हिमाचल प्रदेश 

सुखी  जीवन  की  ओर

आपकी पुस्तक सुखी  जीवन की ओर - पढ़कर आनंद की अनुभूति कर रहा हूँ| लिखित शब्द यथार्थ अर्थात सत्य है,यथार्थ का यह असर आपके  जीवन में भी झलकता है|शब्दों की सीमा होती है परन्तु आपके लिखित शब्द जैसे जीवंत हैं,प्रैक्टिकल हैं और जीवन की सही दिशा में पथ-प्रदर्शक हैं|आपके द्वारा रचित यह पुस्तक मेरे रोम-रोम में असर दाल रही है|प्रभु कृपा करे की आपकी कलम में और जीवन में और ताक़त भरे ताकि आप हम सबके लिए प्रेरणास्रोत ने रहे|                                                                                                                                                 

-राकेश कुमार (भारतीय वायु सेना , नई दिल्ली)

 

 

 

सुखी जीवन की और-समीक्षा यह कृति रोचक है और जीवन में निम्न अंशो में प्रेरणादायक और मार्गदर्शक भी है/पुस्तक बताती है कि -१-संतोष मन की अवस्था है/सबसे अच्छी बात यह है कि-संतोषी सदा सुखी२-विश्वास जीवन की शक्ति है/यह हमें सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है ताकि जीवन सफल हो सके/३-लेखक ने बहुत सुंदर शब्दों में लिखा है कि यथासंभव ईमानदारी का प्रयोग करना चाहिए/इससे लाभ ही होगा/४-संवेदनशील और धैर्यवान होना अनिवार्य है/५-वासना की आंधी उड़ा ले जायेगी,कृपया इससे बचिए/  उपर्युक्त निष्कर्षों तक पहुँचने के लिए विभिन्न तर्क व् उद्धरण दिए हैं/जो कि प्रभावित करते हैं/जैसे संवेदनशीलता के सम्बन्ध में पशु को मनुष्य से श्रेष्ठ बताया है/ एक कहानी के माध्यम से बताया है की मनुष्य के पास तो किसी का दर्द सुनने का समय नहीं है लेकिन पशु के पास समय और संवेदना दोनों ही हैं/सुख तक पहुँचने के लिए संवेदनशीलता आवश्यक तत्व है जो हमें पत्थर होने से बचाती है/ लेखक का कहना है कि मनुष्य को समय प्रबंधन पर पूरा ध्यान देना चाहिए ताकि उसके समय का लाभ समाज को भी मिल सके/पुस्तक पढने पर यह भली भाँती महसूस हुआ कि लेखक ने सत्य ही लिखा है कि सुख -दुःख तो आते-जाते रहते हैं लेकिन आनंद भीतरी और शाश्वत है/मृत्यु सच्चाई है/यह एक सहज प्रक्रिया है इसलिए इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि इसे सहज स्वीकार करने की आवश्यकता है/जब व्यक्ति मृत्यु के यथार्थ को स्वीकार कर लेता है तो भय ख़त्म होता है और फिर दुःख का स्थान सहजता ले लेती है/लेखक का कहना है कि  जब सांस त्यागने का वक़्त आये तो ध्यान प्रभु के साथ जुड़ जाए ताकि आत्मा प्रभु में जा समाये और जीवन सफल हो सके/   मैं लेखक से व्यक्तिगत रूप से भली भाँती परिचित हूँ/लेखाकार होने के कारण एक शुष्क विषय व् व्यवसाय  से जुड़े होने के बावजूद वे साहित्य लिख रहे हैं, यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है/वे सादा जीवन बिताते हैं/घटनाएं बिना किसी राग-द्वेष के लिखने का प्रयत्न किया है /व्यक्तिगत अनुभव भी बहुत मधुर शैली में लिखे हैं /इस सुंदर कृति को लिखने के लिए वे बधाई के पात्र हैं/                                                                                                                             

-नरेश कुमार गुप्ता

बी ए   -पंजाब यूनिवर्सिटी

एम् ए   -कुरुक्षेत्र  यूनिवर्सिटी

एल.एल.बी.-दिल्ली यूनिवर्सिटी

एस.ए .एस.-सी जी ए  (निवास-विकास पूरी -नयी  दिल्ली)

सफलता  की  सीढ़ियाँ

सफलता की सीढियां-एक विद्वान् की प्रतिक्रया

मानव की अपनी एक सीमा होती है/मन-बुद्धि-प्राण -ऊर्जा के परिपेक्ष्य में हर शरीर की अपनी-अपनी सीमाएं हैं/यह मानव शरीर में  प्राण,ऊर्जा.मन व् बुद्धि ऐसे संसाधन हैं जो प्रभु की किरपा से हमें मिले हैं और इनकी अपनी-अपनी सीमाएं हैं/अगर जीवन में हम इन संसाधनों का सदुपयोग करते हैं तो वाकई हमें ज़िन्दगी में सफलताएं मिलती हैं /इसके लिए हर मानव को उचित मार्ग-दर्शन की आवश्यकता है/

आदरणीय राम कुमार सेवक द्वारा लिखित पुस्तक सफलता की सीढियां एक ऐसी ही पुस्तक है जो उत्तम मार्ग-दर्शन से भरी हुई है /इसमें लेखक ने बहुत ही प्रभावी ढंग से यह मार्ग-दर्शन प्रदान करने की कोशिश की है की कैसे हमें अपने जीवन के सही लक्ष्यों का निर्धारण करके उन्हें हासिल करना है/सही मार्ग-दर्शन प्राप्त करके योजनाबद्ध तरीके ,धैर्य व् कड़ी म्हणत द्वारा उनको प्राप्त करने की कोशिश हर किसी को करनी चाहिए/साथ ही हमें अपने जीवन में ईमानदारी व् इंसानियत को भी महत्ता देनी है ताकि हमें जो कामयाबी मिले वह हमारे लिए और दूसरों के लिए भी सुख का कारण बने/

पुस्तक की भाषा -शैली बहुत सरल-सहज - सुंदर व् प्रभावशाली  है/हर विषय को इस प्रकार लिखा गया है जैसे गागर में सागर भर दिया हो/मैं लेखक को इसके लिए बहुत बधाई देता हूँ/आशा करता हूँ की यह पुस्तक भविष्य में भी हम सबका मार्ग-दर्शन करती रहेगी/

                                      

 -मनोहर लाल (वरिष्ठ आरेखक)

(एकीकृत मुख्यालय -रक्षा मंत्रालय ,नेवी

 

सफलता की सीढियां-एक पाठक की दृष्टि में

हमारे अन्दर ईश्वरीय शक्ति है /उस शक्ति के द्वारा हम सब कुछ करने में समर्थ हैं/आज मेरे अन्दर की उन समस्त शक्तियों का एहसास मुझे हो रहा है जो मुझे इश्वर के द्वारा जन्म के समय दी गयीं /मेरे लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में सफलता की सीढियां नामक किताब (लेखक-श्री राम कुमार सेवक) ने नया जोश.उमंग .उत्साह का संचार किया है/यह असफलता या फिर अनिर्णय की स्थिति की दुविधा में फंसे लोगों के लिए राम बाण औषधि और बहुत कारगर सिद्ध हो सकती है/
                                                                                   -शंकर लाल मीना (लेखाकार)

अन्य  प्रतिक्रिया

Vikas Arora Ji’s Reaction
Vikas Arora.pdf
Adobe Acrobat Document 27.8 KB

Note: Please fill out the fields marked with an asterisk.