प्रगतिशील साहित्य ऐसी पुस्तकों का प्रकाशन करता है, जो जीवन जीने में मानव की सहायक है| इनमें जीवनशैली,  अध्यात्म, धर्म - दर्शन आदि की पुस्तकें सम्मिलित हैं| यह  प्रकाशन प्राचीनता में नवीनताका प्रतीक है|

(जीवन विकास की पुस्तकों के प्रकाशक)

  प्रगतिशील साहित्य मासिक पत्रिका मानवता व् मानवीय मूल्यों को संरक्षण देने हेतु सितम्बर 2013 से निरंतर प्रकाशित की जा रही है |पत्रिका देश समाज व् विश्व की परिस्थितियों पर पैनी नज़र रखती है |आज मानव की संवेदनहीनता ने यह सोचने को मजबूर कर दिया है कि  इंसान के शरीर में इंसान की जगह कौन आकर बैठ गया है कि न बच्चे सुरक्षित हैं ,न स्त्री ,न ही सीधे-साधे आम नागरिक |आदमी का शिकार खुद आदमी ही कर रहा है |नए -नए क़ानून बनाये जा रहे हैं   लेकिन हालात बदल नहीं रहे |अपराधो की संख्या लगातार बढ़ रही है और इंसान की लाचारी भी |हमारे ऋषि-मनीषी -दार्शनिक-विचारक लगातार चिंता कर रहे हैं और चिंतन भी |

हमारा यह दृढ मत है कि यदि इंसान के विचारो में पॉजिटिव यानी कि सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके इस स्थिति से छुटकारा पाया जा सकता है |क़ानून आज अपराधी में भय पैदा नहीं करता क्यूंकि तर्कशील वकील झूठ को सच और सच को झूठ बनाने में पारंगत हैं इसलिए डरता है तो आम आदमी या लाचार औरत जो न सड़क पर सुरक्षित है न घर में |अपराधो की प्रकृति बताती है कि हमारा पारिवारिक ढांचा खतरे में है |

प्रगतिशील साहित्य अपने सीमित ससाधनो द्वारा वैचारिक परिवर्तन की मुहीम पिछले डेढ़ वर्षो से छेड़े हुए है |अपने विशेषांकों द्वारा यह लोगो की मानसिकता बदलने में लगा है | इसका असर भी हुआ है |पत्रिका देश के इक्कीस राज्यों में जाती है और पूरे परिवार को यह भरोसा दिलाती है कि हम सब एक परमात्मा की संताने हैं और कोई भी पिता अपनी संतान का बुरा नहीं करता इसलिए आशा और विश्वास को बचाकर रखें |हम देश-समाज व् विश्व का वातावरण बदल सकते हैं |

काम बहुत बड़ा है और संसाधन बहुत सीमित | हमें आपका सहयोग चाहिए ताकि साधन बढ़ें,गति बढे और मानव का मानवता के प्रति विश्वास बढे |

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